◆ *छत्रपति शिवाजी महाराज और स्त्री-सम्मान*

 ◆ *छत्रपति शिवाजी महाराज और स्त्री-सम्मान*

मराठों के इतिहास में छत्रपति शिवाजी महाराज की उदारता, जन्मजात दयालुता, निष्पक्षता व महिलाओं के प्रति सम्मान के असंख्य किस्से अंकित है। 


शिवाजी महाराज के विजय-अभियान के दौरान महाराज के साथियों ने जब कल्याण शहर अपने कब्जे में लिया तब उस शहर का गवर्नर मुल्ला अहमद नामक एक अरब था। कल्याण उस समय बीजापुरी आदिलशाही सल्तनत में एक समृद्ध शहर था।


कल्याण विजय के दौरान मराठों के हाथ में मुल्ला अहमद का पूरा परिवार आ गया तब मराठों ने उस परिवार के सदस्यों में से मुस्लिम गवर्नर अहमद की पुत्रवधू को शिवाजी महाराज के पास भेज दिया। 


जब अप्रतिम सौंदर्य की धनी उस स्त्री को महाराज के समक्ष प्रस्तुत किया गया तब महाराज ने अपने आसन से खड़े होकर उस स्त्री को विनम्रता से नमन किया और उसके सौंदर्य की प्रसंशा करते हुए कहा, "काश, मेरी माता भी आप जैसी सुंदर होती तो मैं भी आज अधिक रूपवान होता!"


यह दृश्य देखकर वहाँ उपस्थित लोग हक्का-बक्का रह गए। एक बंदी बनाई गई दुश्मन पक्ष की स्त्री को सम्बोधित अपने इस सरल शब्दों के माध्यम से शिवाजी महाराज ने अपने साथीदारों से समक्ष महिलाओं का सम्मान करने का एक अनुकरणीय दृष्टांत प्रस्तुत किया।

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(सन्दर्भ: Shivaji: The Portrait of a Patriot, लेखक: ए. आर. कुलकर्णी, पृ. 45-46, भावानुवाद: राजेश आर्य)

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